नई दिल्ली, मार्च 26 -- दिल्ली के ग्रीन पार्क शवदाह गृह में बुधवार को भावनाएं चरम पर थीं। कोई हाथ जोड़े खड़ा था तो किसी की आंखों से आंसुओं की अविरल धारा बह रही थी। 13 सालों तक मौन पीड़ा सहने वाले हरीश राणा की अंतिम विदाई गहरे शोक और मौन के बीच पूरी हुई। अथाह दर्द के बीच हरीश के पिता ने हाथ जोड़कर लोगों से कहा, कोई भी रोए नहीं। हिम्मत रखो, यह आत्मा शांति से जाए।2013 में कोमा में चले गए थे निष्क्रिय इच्छा मृत्यु की अनुमति पाने वाले 31 साल के हरीश राणा के निधन के बाद हृदयविदारक माहौल के बीच पिता अशोक राणा ने रुंधे गले से दर्द बयां किया तो सभी की आंखें नम हो गईं। राजनगर एक्सटेंशन स्थित राज एम्पायर सोसाइटी में रहने वाले अशोक राणा के बड़े बेटे हरीश चंडीगढ़ में बीटेक की पढ़ाई करने के दौरान वर्ष 2013 में पीजी में गिर जाने से कोमा में चले गए थे।देश में...