रांची, अक्टूबर 26 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक विवाद में आर्थिक रूप से कमजोर पत्नी की परेशानी स्पष्ट होने पर अदालत अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दे सकती है, भले ही उसने इसके लिए अलग से औपचारिक आवेदन नहीं दिया हो। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रिया की औपचारिकताएं किसी व्यक्ति के वैधानिक अधिकार के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने तलाक की अपील लंबित रहने के दौरान पति को पत्नी को हर महीने 15 हजार रुपये अंतरिम भरण-पोषण देने का निर्देश दिया है। जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने यह आदेश पति की ओर से दायर तलाक संबंधी अपील पर सुनवाई के दौरान दिया। मामला हजारीबाग फैमिली कोर्ट के तीन नवंबर 2025 के उस फैसले से जुड़ा है, जिसमें क्रूरता और परित्याग के आधार पर पति ...