प्रयागराज, अप्रैल 18 -- Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सरकारी अधिकारी के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द करते हुए स्पष्ट किया है कि केवल किसी आदेश के गलत या अवैध होने के आधार पर विभागीय कार्रवाई नहीं की जा सकती, जब तक कि उसमें दुर्भावना, भ्रष्टाचार या कदाचार के स्पष्ट प्रमाण न हों। मामला नगर निगम वाराणसी के तत्कालीन कर निर्धारण अधिकारी/जोनल अधिकारी रामेश्वर दयाल का है, जिनके खिलाफ विभागीय जांच के बाद उन्हें सेवा से हटाने की सजा दी गई थी। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। याचिका पर न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने सुनवाई की। याची पर आरोप था कि उन्होंने ठाकुर राधा देव महादेव जी मंदिर नाम से पंजीकृत भवन जिसका कि उसके मालिमो जावेद और आयशा खातून के पक्ष में कथित रूप से बैनामा कर दिया था के नाम...