नई दिल्ली, अक्टूबर 25 -- अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ों से बहने वाली सियांग नदी- जो असम में जाकर विशाल ब्रह्मपुत्र बनती है, इस समय बारूद के ढेर पर बैठी है। पीढ़ियों से आदिवासियों की जीवनरेखा रही इस नदी पर केंद्र और राज्य सरकार 11,200 मेगावाट का विशाल 'सियांग अपर बहुउद्देशीय प्रोजेक्ट' (SUMP) बनाना चाहती है। सरकार का तर्क है कि चीन की नापाक पानी वाली चालों का जवाब देने के लिए यह डैम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी है। लेकिन नदी किनारे बसे आदिवासियों के लिए यह प्रोजेक्ट उनकी जमीन, संस्कृति और वजूद पर मंडराता सीधा खतरा है। विरोध की यह आग अब सड़कों पर उतर चुकी है। 23 अक्टूबर को पासीघाट में उग्र प्रदर्शनकारियों ने एनएचपीसी के दफ्तर और पुलिस स्टेशन में आग लगा दी, जिसके बाद से पूरी सियांग घाटी में तनाव का माहौल है।आखिर सरकार क्यों बना रही है...