नई दिल्ली, मई 25 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला को परिभाषित करने के लिए गठित होने वाली विशेषज्ञ समिति को संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से परामर्श करना चाहिए ताकि आम जनता की राय सुनी जा सके। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने यह भी कहा कि समिति में अधिक सदस्य नहीं हो सकते क्योंकि इससे प्रबंधन मुश्किल हो जाता है। पीठ ने कहा कि हम 30 लोगों की समिति नहीं बना सकते। समिति को विशेषज्ञों से परामर्श लेना चाहिए और इसमें पांच-सात सदस्य होने चाहिए। हम इसे आदेश में दर्ज कर लेंगे। सुनवाई शुरू होते ही केंद्र की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति और न्याय मित्र ने समिति में शामिल कि...