अररिया, अप्रैल 24 -- अररिया, वरीय संवाददाता स्वतंत्रता सेनानियों का गढ़ अररिया जिले में एक से बढ़कर एक रणबांकुरे पैदा हुए हैं जिन्होंने आजादी के लिए अपनी जान की परवाह किये हंसते-हंसते शहीद हो गये। इन शहीदों की एक लंबी फेहरिस्त है। अररिया की क्रांतिकारी माटी का ही तासिर था कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, देशरत्न राजेन्द्र प्रसाद, आचार्य जेपी कृपलानी, डा राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण जैसी विभूति अपने आपको यहां आने से नहीं रोक पाए थे। लेकिन आजादी के बाद जिले के शहीदों को जो सम्मान मिलना चाहिए था वह आज तक नहीं मिला। स्थिति यह है कि यहां स्वतंत्रता से जुड़े ऐतिहासिक स्थल जहां बदहाल है वहीं महापुरूषों की प्रतिमाएं उपेक्षित। यह भी पढ़ें- बिना जन्म प्रमाण पत्र के नहीं बनेगा पैन कार्ड, ट्रैक्टर खरीद पर नहीं लगेगा पैन कार्ड...