विधि संवाददाता, जुलाई 3 -- चार साल पहले सरकार अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण शुरू होने से पहले हुए जमीन घोटाले में कड़ी कार्रवाई कर देती तो चढ़ावा चोरी का प्रकरण यूं सिरदर्द न बनता और न ट्रस्ट से लेकर शासन- प्रशासन की विपक्ष फजीहत कर पाता। अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण शुरू होने से पहले आर्थिक गतिविधियां भी बढ़नी शुरू हो गई थीं। रामनगरी पर उद्यमियों ही नहीं, नेताओं, बिल्डरों के करीबी अफसरों, प्रॉपर्टी डीलरों, बिल्डरों तक की निगाहें थीं। अयोध्या में प्रशासन व पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही अन्य रसूखदारों के जमीनों की धड़ल्ले से खरीद किए जाने का मामला दिसंबर 2021 में उठा था। आरोप था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद अयोध्या में अफसर, सफेदपोशों की मिलीभगत से खरीद-फरोख्त की गई थी। खासकर अयोध्या में तैनात रहे अधिकारियों प...