नई दिल्ली, मई 19 -- नई दिल्ली। दुनियाभर के वित्तीय बाजारों में इन दिनों अमेरिकी बॉन्ड यील्ड यानी आय की तेजी चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है। अमेरिका के 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड से होने वाली आय लगातार ऊंचे स्तर पर पहुंच रही है, जिससे शेयर बाजारों, मुद्राओं और निवेशकों की रणनीतियों पर असर दिखने लगा है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। विदेशी निवेश निकासी से लेकर रुपये की कमजोरी और शेयर बाजार की अस्थिरता तक, इसका प्रभाव कई स्तरों पर दिखाई दे रहा है। क्या होते हैं अमेरिकी बॉन्ड? यह भी पढ़ें- डॉलर की नहीं, पाकिस्तान के मुकाबले भी गिरा भारत का रुपया? जानिए पिछले 10 साल का हालअमेरिकी बॉन्ड क्या होते हैं? अमेरिकी सरकार जब अपने खर्च और कर्ज की जरूरतों को पूरा करने के लिए बाजार से पैसा जुटाती है, तब वह ट्रेजरी बॉंड जारी करती है। निवेशक इन्हें खरीदकर सरकार ...