अमेरिकी-चीनी दबावों से मुक्ति का रास्ता निकालता भारत
नई दिल्ली, जुलाई 19 -- आलोक जोशी,वरिष्ठ पत्रकार रूस-यूक्रेन जंग हो या अमेरिका-इजरायल और ईरान का युद्ध, दोनों मौकों पर देखा गया कि किसी भी लड़ाई की आग अब पूरी दुनिया में फैलते देर नहीं लगती। उसके नुकसान फौरन से पेश्तर हमारी जेब तक पहुंचने लगते हैं, लेकिन इन लड़ाइयों से अलग, बरसों से विश्व की दो महाशक्तियों के बीच जो प्रच्छन्न लड़ाई चल रही है, उसका असर तो और भी खतरनाक है। अमेरिका हर मोर्चे पर दुनिया को फतह करना चाहता है और चीन इस मामले में उसका सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी बनकर सामने खड़ा हुआ है। ये दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और बाकी दुनिया किसी-न-किसी तरह उनके बीच के व्यापार-युद्ध में पिसती नजर आती है। भारत की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है, बल्कि विकासशील देश व बड़ी जनसंख्या होने के नाते यहां समस्याएं और चुनौतियां कुछ ज्यादा ही हैं। ...
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