नई दिल्ली, मई 14 -- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नौ साल बाद चीन की पहली राजकीय यात्रा ने वैश्विक भू-राजनीति के समीकरण बदल दिए हैं। बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से गर्मजोशी भरी मुलाकात में ट्रंप ने उन्हें 'महान नेता' और 'मित्र' कहा। महीनों से चले आ रहे टैरिफ युद्ध और तीखी बयानबाजी के बाद दोनों महाशक्तियों के बीच सुलह के संकेत मिल रहे हैं। यह यात्रा भारत के लिए मिश्रित भावनाओं वाली है, एक तरफ आश्वासन, दूसरी तरफ गहरी चिंता। नई दिल्ली अब सवाल कर रही है कि अगर अमेरिका और चीन रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता कम करके सहयोग की राह पर बढ़े, तो एशिया में भारत की 'संतुलनकारी शक्ति' की भूमिका क्या बचेगी?भारत के लिए क्या संकेत? नई दिल्ली के लिए यह घटनाक्रम आश्वस्त करने वाला भी है और चिंताजनक भी। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अमेरिका और चीन दोनों...