अमेठी में गांव-गांव उठी थी अंग्रेजों भारत छोड़ो की आवाज
गौरीगंज, अगस्त 8 -- अमेठी। आजादी की लड़ाई में अमेठी की धरती का योगदान भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वर्ष 1942 में अमेठी जिला अस्तित्व में नहीं था। वर्तमान जिले का बड़ा हिस्सा तत्कालीन सुल्तानपुर और रायबरेली जिलों में आता था। भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान होते ही यहां के गांवों में भी अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठने लगी। किसी ने लोगों को आंदोलन के लिए संगठित किया तो किसी ने गिरफ्तारी देकर अंग्रेजी शासन का विरोध किया। इतिहास के पन्ने इन क्रांतिकारियों की वीर गाथा गा रहे हैं। गौरीगंज के रोहसी बुजुर्ग निवासी रामनाथ सिंह स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे और भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जेल गए। वहीं बाबू गिरिराज सिंह ने गौरीगंज में महात्मा गांधी का स्वागत किया था। स्थानीय लोगों ने गौरीगंज रेलवे स्टेशन पर 100 रुपए की थ...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.