गौरीगंज, मार्च 7 -- अमेठी। तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद भी महिलाएं आगे बढ़ती चली जा रही हैं। किसी ने दिव्यांगता को हराकर अपने सपनों को उड़ान दी तो किसी ने पढ़ाई लिखाई में कामयाबी के झंडे गाड़े। कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो न सिर्फ अपनी मुसीबत से लड़ी बल्कि औरों के लिए भी मार्गदर्शक साबित हुई। महिला दिवस पर प्रस्तुत है जिले की कुछ ऐसी ही महिलाओं की कहानी: 1: दिव्यांगता भी नहीं रोक सकी शशि का हौसलाशुकुल बाजार क्षेत्र के रहमतगढ़ गांव की दिव्यांग शिक्षिका शशि तिवारी हौंसले और आत्मविश्वास की मिसाल बन गई हैं। जन्म से दिव्यांग होने के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। शशि ट्राई साइकिल से रोज अपने गांव के प्राथमिक विद्यालय पहुंचती हैं। जहां वह प्रधानाध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। कठिन परिस्थितियों के बीच उन्होंने स्नातक और बीएड क...
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