गौरीगंज, जून 13 -- अमेठी। कालिकन मोड़ सरायकाधा डेढ़पसार में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथा सुनाते हुए कथा वाचक पं. ज्ञान प्रकाश ने सती प्रसंग का वर्णन करते हुए पति-पत्नी के मधुर सम्बन्धों का उल्लेख किया। देवी भगवती सती का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि माताओं को अपने पतियों को परमेश्वर के रूप में मानना उनके लिए हर प्रकार से शुभ फल दायक होता है। उन्होंने कहा कि माता सती ने भगवान शंकर के मना करने के बावजूद भी दक्ष प्रजापति के द्वारा किए जा रहे यज्ञ में पहुंचकर अपने पति की आज्ञा का उल्लंघन किया। जिसका खामियाजा उन्हें अपना शरीर छोड़कर भुगतना पड़ा। उन्होंने कहा कि बिना निमंत्रण के कहीं जाना ठीक नहीं होता है।
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