अमेठी की अलख: नज्म पर छह महीने, तिरंगे पर कारावास, आजादी के 3 महीने बाद भी जेल में
गौरीगंज, अगस्त 8 -- चिन्तामणि मिश्रा, संवाददाता, अमेठी। भारत की आजादी की लड़ाई के सबसे तूफानी अध्याय में अमेठी की धरती भी शामिल थी। जब गांधीजी ने करो या मरो का आह्वान दिया, तो अमेठी के गांवों में स्वतंत्रता की अलख जग उठी। अमेठी उस समय अस्तित्व में नहीं था - वर्तमान जिले का बड़ा हिस्सा सुल्तानपुर और रायबरेली जिलों में विभाजित था। इसके बावजूद यहां के हजारों नागरिक इस ऐतिहासिक आंदोलन में कूद पड़े। गांधीजी के आगमन की खबर जब अमेठी पहुंची, तो पूरा क्षेत्र सक्रिय हो उठा। गौरीगंज रेलवे स्टेशन पर बाबू गिरिराज सिंह ने महात्मा गांधी का भव्य स्वागत किया। स्थानीय लोगों की भावभीनी भेंट ने गांधीजी को अभिभूत कर दिया - 100 रुपये की थैली उन्हें सौंपी गई, जो उस समय की एक बड़ी आर्थिक सहायता थी। बड़ी संख्या में ग्रामीण रेलवे स्टेशन पर जुटे और आजादी की लड़ाई क...
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