अभी भी हल-बैल से खेती कर रहे हैं किसान नकछेद
सुल्तानपुर, जुलाई 4 -- बल्दीराय, संवाददाता। एक ओर जहां आधुनिक कृषि में ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और नई तकनीकों का बोलबाला है, वहीं बल्दीराय क्षेत्र के ग्राम पूरे दुआ शाह के किसान नकछेद आज भी हल-बैल के सहारे खेतों की जुताई कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। क्षेत्र में यह दृश्य लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है। किसान नकछेद का कहना है कि आर्थिक तंगी, छोटे जोत का आकार और आधुनिक कृषि यंत्रों का बढ़ता खर्च उन्हें आज भी पारंपरिक खेती करने के लिए मजबूर करता है। उनका मानना है कि हल-बैल से खेती करने में भले अधिक मेहनत लगती हो, लेकिन इससे मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है और डीजल पर निर्भरता नहीं रहती। देश के कई हिस्सों में आज भी कुछ छोटे और सीमांत किसान हल-बैल से खेती करते हैं, हालांकि अधिकांश क्षेत्रों में ट्रैक्टरों का उपयोग तेजी से बढ़ चुका...
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