नई दिल्ली, जनवरी 29 -- नई दिल्ली, कार्यालय संवाददाता। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भले ही एक मौलिक अधिकार हो, लेकिन यह असीमित नहीं है। इसका इस्तेमाल किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ मानहानिकारक, अपमानजनक या दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उचित प्रतिबंध लगाए गए हैं। यदि अभिव्यक्ति किसी की प्रतिष्ठा और गरिमा को ठेस पहुंचाती हो, तो वह संवैधानिक संरक्षण के दायरे में नहीं आती। न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की पीठ ने यह टिप्पणी उस दौरान की जब कुछ वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के प्रसार को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के आधार पर सही ठहराने का प्रयास किया गया। अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को किसी व्यक्ति या संस्था की ...