कटिहार, अप्रैल 13 -- कटिहार, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि सीमांचल की उपजाऊ धरती पर कभी लहलहाती गेहूं की फसल आज सिमटकर संघर्ष की कहानी बन गई है। पिछले दो दशकों में कटिहार जिले में गेहूं की खेती महज एक चौथाई रकबे तक सिमट गई है। वर्ष 2006 में जहां 60 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बुआई होती थी, वहीं 2026 में यह घटकर मात्र 14 हजार हेक्टेयर रह गई है। यह गिरावट सिर्फ आंकड़ा नहीं, बल्कि धरती पुत्रों की पीड़ा और बदलते हालात की गवाही है।आज हालात यह हैं कि अधिकांश किसान केवल पशुपालन के सहारे गेहूं उगा रहे हैं, ताकि भूसा पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल हो सके। मुनाफे की उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी है। कदवा, बारसोई, बलरामपुर, आजमनगर, प्राणपुर, मनसाही, डंडखोरा, हसनगंज, कोढ़ा, फलका, समेली, कुरसेला, कटिहार, मनिहारी, बरारी और अमदाबाद जैसे प्रखंडों में अब भी गेहूं की...
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