नई दिल्ली, जुलाई 28 -- दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब एक महीने तक आंदोलन चलाकर केंद्र सरकार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने पर मजबूर कर देने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फाउंडर अभिजीत दीपके के बीच क्या मतभेद उत्पन्न हो चुके हैं? अधिकतर मुद्दों पर अभी तक सुर में सुर मिलाते रहे वांगचुक और सीजेपी की राय एक विषय पर अलग है। आंदोलनकारियों पर पुलिस ऐक्शन को लेकर दोनों के विचारों में समानता नहीं है। दरअसल, जंतर-मंतर पर 20 जून से शुरू हुए आंदोलन के बाद जब सीजेपी और सरकार के बीच बातचीत शुरू हुई तो दीपके और उनकी टीम ने तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली और सबसे प्रमुख मांग थी नीट पेपर लीक की जवाबदेही तय करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जाए। दूसरी मांग थी कि नीट पेपर लीक के बाद खुदकुशी करने ...