फतेहपुर, नवम्बर 23 -- फतेहपुर/खागा। बीते कुछ वर्षों से ब्यूरोक्रेसी दोआबा में स्थानीय नदियों को पुनर्जीवित करने की मशक्कत कर रही है लेकिन उद्गम स्थल में झीलों की खुदाई के दौरान तकनीकी पहलुओं को गंभीरता से न लेने व जल संचय के लिए बनाई गई योजनाओं को धरातल पर समुचित रूप से न उतारे जाने से नदियों में साल भर 'सूखा' रहता है। मानसून बीते कुछ दिन ही हुए हैं लेकिन स्थानीय नदियों में सूखा दिखने लगा है। 2022 में तत्कालीन डीएम अपूर्वा दुबे ने गर्मियों में ससुर खदेरी संख्या एक की खुदाई कर उसे पुनर्जीवित कराया था। उम्मीद जताई जा रही थी कि मानसून के दौरान ठिठौरा व सेमरामानापुर में मौजूद झीलें इस नदी को प्रवाहित करने में मदद करेंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बेहतर मानसून के बावजूद नदी में बढ़िया जल प्रवाह नहीं हो सका। बुद्धिजीवी इसके कारणों पर मंथन करने पर जोर द...
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