नई दिल्ली, मार्च 13 -- महाराष्ट्र में बचपन की पढ़ाई यानी प्री-प्राइमरी एजुकेशन की दुनिया अब बदलने वाली है। अक्सर देखा जाता है कि गलियों और मोहल्लों में बिना किसी ठोस नियम के प्राइवेट प्री-स्कूल खुल जाते हैं, जहां न तो फीस का कोई पैमाना होता है और न ही शिक्षा की गुणवत्ता का। लेकिन अब महाराष्ट्र सरकार ने इस 'अनगाइडेड' सेक्टर को एक कानूनी दायरे में लाने की तैयारी पूरी कर ली है। राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री दादा भूसे ने विधानसभा में इस बात की पुष्टि की है कि निजी प्री-स्कूलों को रेगुलेट करने के लिए एक नया और सख्त कानून लाया जा रहा है। इसका सीधा मकसद छोटे बच्चों की सुरक्षा, उनके सीखने के तरीके में एकरूपता और स्कूलों की जवाबदेही तय करना है।रजिस्ट्रेशन हुआ अनिवार्य सरकार ने साफ कर दिया है कि अब कोई भी प्राइवेट प्री-स्कूल बिना रजिस्ट्रेशन के नही...
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