नई दिल्ली, अप्रैल 21 -- उम्र भले ही ढलान पर हो, लेकिन दिल अगर धड़कना न छोड़े तो जिंदगी हर मोड़ पर नई शुरुआत का मौका देती है। कुछ ऐसा ही नज़ारा राजस्थान के भीलवाड़ा में देखने को मिला, जहां सफेद बालों और झुर्रियों के बीच इश्क ने फिर से करवट ली। नागौरी गार्डन स्थित माहेश्वरी भवन में आयोजित 'जीवनसाथी परिचय सम्मेलन' ने यह साबित कर दिया कि साथ और अपनापन किसी उम्र का मोहताज नहीं होता। यहां 50 से 80 वर्ष की उम्र के 115 बुजुर्ग एक ही छत के नीचे जुटे-मकसद सिर्फ इतना कि अकेलेपन की दीवारों को तोड़कर फिर से जिंदगी को साथी के साथ जिया जाए।अकेलेपन के खिलाफ बुजुर्गों की नई जंग इस अनोखे सम्मेलन में शामिल हर चेहरे के पीछे एक कहानी थी-किसी ने जीवनसाथी खोया, कोई तलाक के बाद अकेला रह गया, तो कोई कभी शादी ही नहीं कर पाया। लेकिन इन सबके बीच एक चीज कॉमन थी-साथ क...