अब टंकी फुल नहीं, जरूरत के हिसाब से डलवा रहे पेट्रोल
बागपत, मई 16 -- बड़ौत। पेट्रोल पंप के बाहर लगी कतारों में इस समय सिर्फ गाड़ियां नहीं, बल्कि बढ़ते खर्च की चिंता भी साफ तौर पर दिखाई देने लगी है। हर किसी की नजर मीटर पर तेजी से बढ़ती रकम पर टिक जा रही है। टंकी फुल कराने के बजाय अब जरूरत पर ध्यान दिया जा रहा है। दरअसल, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों ने अब घर से लेकर बाजार तक पूरे मासिक बजट का गणित बिगाड़ना शुरू कर दिया है। शहर में रोजाना बाइक या कार से सफर करने वाले मध्यमवर्गीय परिवार सबसे ज्यादा दबाव महसूस कर रहे हैं। पेट्रोल भरवाने वाले वाहन चालकों का कहना है कि पहले जहां महीने का ईंधन खर्च किसी तरह संभल जाता था, वहीं अब हर हफ्ते बजट दोबारा बनाना पड़ेगा। किदवई नगर के कारोबारी अनुराग मिश्रा बताते हैं कि पहले जितने रुपये में महीने भर पेट्रोल भर जाता था, अब उसी खर्च में मुश्किल से तीन हफ्ते काम चल प...
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