छपरा, मार्च 27 -- आंखों में नमी, हाथ में झोला लिए लौट रहे मजदूर परदेस में बुझीं चिमनियां, तो गांव की राह पकड़ने लगे मजदूर न नौकरी, न खाना दर्द समेटे लौट रहे प्रवासी मजदूर पेज पांच की लीड छपरा, नगर प्रतिनिधि। अंतरराष्ट्रीय तनाव और गैस संकट की वजह से छोटे-छोटे उद्योगों की चिमनियां बुझने लगी हैं, तो सबसे पहले उन हाथों पर असर पड़ा है जो इन कारखानों और होटलों को चलाते थे। नतीजा यह है कि परदेस में बसे सारण के मजदूर अब बेरोजगारी, भूख और अनिश्चित भविष्य के बीच अपने गांवों की ओर लौटने को मजबूर हैं। उनकी आंखों में टूटते सपनों की नमी और दिल में परिवार की चिंता साफ झलक रही है। छपरा जंक्शन पर उतरते मजदूरों की आंखों में अपने गांव की मिट्टी से मिलने की खुशी जरूर थी, लेकिन उस खुशी के पीछे छिपा दर्द भी साफ दिख रहा था। किसी के हाथ में छोटा सा बैग था, तो को...
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