कटिहार, अप्रैल 4 -- कटिहार, निज प्रतिनिधि। अगस्त व सितंबर माह में अपने रौद्र रूप में रहने वाली नदियां भी अप्रैल माह में ही हांफने लगी है। जिले में छोटी नदी, उपधारा ही नहीं महानंदा जैसी नदियां भी हांफने लगी है। नदी की उपधारा सूखने या पानी कम होने के कारण ग्रामीण उस जगह खीरा, तरबूज की खेती कर रहे हैं। गंगा नदी की भी कमोबेश यही स्थिति है। अमदाबाद प्रखंड के किशनपुर-गुआगाछी तथा काला दियारा के बीच गंगा नदी की उपधारा को ग्रामीण मार्च के अंतिम सप्ताह से ही पैदल पार करने लगे है। कारी कोसी, चांपी धार, कमला धार सहित अन्य कई छोटी नदियां अप्रैल माह में ही मृतप्राय हो चुकी है। आजमनगर प्रखंड में कई स्थानों पर महानंदा नदी का पाट अर्थात चौड़ाई सौ से 200 मीटर तक ही रह गया है। विशेषज्ञ इसे आने वाले समय के लिए खतरे की घंटी बता रहे हैं। यूं तो गर्मी का मौसम श...