प्रयागराज, मार्च 28 -- Allahabad Highcourt Order News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि केवल संदेह या शक के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि अपहरण का आरोप अदालत ने तय नहीं किया। आरोप हत्या का था, जिसमें सेशन कोर्ट ने बरी कर दिया, तो अपरहण के आरोप में सजा नहीं दी जा सकती। दोनों अपराध अलग है। मिलते जुलते अपराध नहीं है। बिना आरोप सजा सुनाना गलत है। इसी के साथ कोर्ट ने आईपीसी की धारा 364 के तहत अपीलार्थी विनोद कुमार की सात साल कैद की सजा रद्द कर दी है। न्यायमूर्ति अनिल कुमार दशम ने पाया कि अभियोजन पक्ष अभियुक्त विनोद कुमार के खिलाफ अपहरण का पर्याप्त सबूत नहीं दे सका। कोर्ट ने कहा कि आईपीसी की धारा 364 के तहत अपराध के लिए यह साबित करना होगा कि अभियुक्त ने अपहरण किया था और उसका हत्या करने का इरादा था। यह भी पढ़ें- शादीशुदा...
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