रांची, मई 2 -- रांची। विशेष संवाददाता झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नौ अपर समाहर्ताओं की संयुक्त सचिव के पद पर प्रोन्नित के मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रोन्नति के लिए विचार किया जाना संविधान प्रदत्त अधिकार है, जो अनुच्छेद 14 और 16 से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने यह भी माना कि प्रार्थियों के साथ अन्याय हुआ है और राज्य की त्रुटि के कारण उनका मौलिक अधिकार प्रभावित हुआ। यह भी पढ़ें- UPPSC PCS : अपनी पीसीएस कॉपी देखने के बाद भड़का BDO पद पर चयनित MBBS डॉक्टर, चेकिंग पर उठाया सवालप्रोन्नति के मामले की पृष्ठभूमि इन अपर समाहर्ताओं की नियुक्ति झारखंड सिविल सेवा परीक्षा 2006 के माध्यम से हुई थी। इन्होंने संयुक्त सचिव पद पर प्रोन्नति के लिए याचिका दायर की थी। राज्य...