मुजफ्फरपुर, जून 15 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। उम्र की इस ढलती शाम में, आंखों में तैरती है यादों की नमी। छूट गए पीछे वो सारे अपने, वृद्धाश्रम के कोने में सिमटी बुजुर्गों की आंखों में दिखती है वह कमी...। कोई 62 साल के तो कोई 70 साल के। चाय पीने से लेकर खाना खाने तक एक-दूसरे के साथी। कुछ सालों पहले तक ये एक-दूसरे को जानते भी नहीं थे। कोई मुंगेर के तो कोई वैशाली के, कई मुजफ्फरपुर के अलग-अलग इलाकों के रहनेवाले, लेकिन आज इनका साझा दर्द एक दूसरे का इन्हें साझेदार और सहारा दोनों बना चुका है। यह भी पढ़ें- अपनों ने दिखाई बेरुखी, आश्रमों में कट रहा बुढ़ापाअपनों ने दर्द दिया तो वृद्धाश्रम में आसरा और अपनापन भी मिला। कोई तीन-चार साल से तो कोई छह साल से यहां रह रहे हैं। मिठनपुरा स्थित वृंदावरण वृद्धाश्रम में 15 से अधिक बुजर्ग रह रहे हैं। इनमें मह...