नई दिल्ली, जून 17 -- कुछ मौतें केवल परिवारों को नहीं रुलातीं, वे राष्ट्र के विवेक को भी कठघरे में खड़ा कर देती हैं। होर्मुज के निकट ओमान की खाड़ी ने भारतीय मूल के तीन नाविकों की अंतिम पुकार अपने भीतर समेट ली। पलाऊ देश के ध्वज वाले तेलवाहक जहाज पर अमेरिकी हमले में मूल रूप से विशाखापट्टनम के मुख्य अभियंता पटनाला सुरेश, हिमाचल प्रदेश के डेक कैडेट आदित्य शर्मा और देवरिया जिले (यूपी) के सुरौली गांव निवासी फिटर शिवानंद चौरसिया की मृत्यु केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस कठोर सच्चाई का प्रतीक है, जिसे विश्व राजनीति आंकड़ों व बयानों के नीचे दबा देती है। भले ही ये नाविक भारतीय जहाज पर नहीं थे, बल्कि दूसरे देश के लिए काम कर रहे थे, लेकिन वे थे भारत के ही सपूत। वे देश के नियमों के तहत ही दूसरे देशों में काम करने गए थे। ऐसे लाखों भारतीय दूसरे देशों में...