नई दिल्ली, अक्टूबर 23 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने बच्चों से संबंधित मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कोर्ट ने कहा कि माता-पिता के विवाद में बच्चे को फुटबॉल की तरफ एक-दूसरे के पाले में नहीं उछाल सकते। बच्चे के बालिग होने तक माता-पिता दोनों की देखरेख अनिवार्य होगी। यह भी पढ़ें- बिना सेक्स 84 दिन रहे साथ, कपल ने शादी के 5 माह बाद मांगा तलाक; हाईकोर्ट बोला. जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस रेणु भटनागर की बेंच ने तलाक लेते समय पति-पत्नी द्वारा किए जाने वाले समझौते में बच्चे को किसी एक पक्षकार के सुपुर्द करने पर नाराजगी जाहिर की है। बेंच ने कहा कि इस परंपरा को बदलना होगा। इसके लिए बेंच अपने विशेष अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए निर्देश देती है कि बच्चे को सौदेबाजी का हिस्सा बनाए बिना उसके बालिग होने तक माता और पिता दोनों को उसके...