बस्ती, मार्च 28 -- दुबौलिया, निज संवाददाता। मनुष्य को उसका कर्म ही सुख या दुःख देता है, जो व्यक्ति इसका कारण अपने अन्दर खोजे ले, वही संत है। जीव को अपने कर्म के कारण जन्म लेना पड़ता है। ईश्वर स्वेच्छा से प्रकट होते हैं, कुसंग तो हर किसी को बिगाड़ देता है। कुसंग के कारण ही कैकेयी की मति भ्रष्ट हो गई। अपने पति महाराजा दशरथ का अपमान कर कैकेयी ने श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांग लिया। यह बातें कथा व्यास स्वरूपानन्द ने श्रीराम कथा के दौरान राम विवाह मैदान दुबौलिया में कही। कथा व्यास ने श्रीराम वन गमन, केवट प्रसंग आदि के माध्यम से श्रीराम कथा को विस्तार दिया। उन्होंने कहा कि सभी प्रकार की अनुकूलता होते हुये यदि मन किसी विषय में न लगे तो वही वैराग्य है। प्रभु श्रीराम ने वनवास कर जगत का कल्याण किया। केवट प्रसंग का वर्णन करते हुये महात्मा जी ने ...
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