रांची, मार्च 22 -- अनगड़ा,प्रतिनिधि। जोन्हा स्थित श्रीराम मंदिर में आयोजित नौ दिनी श्रीराम कथा के दौरान रविवार को आचार्य धर्मराज शास्त्री व्यास ने कहा कि प्रभु श्रीराम ने अपने जीवन के माध्यम से मानव को मानवीय मूल्यों और जीवन संकल्प का बोध कराया। उन्होंने रामकथा का मार्मिक और मनोरम वर्णन करते हुए कहा कि श्रीराम अपने कर्मों से मर्यादा पुरुषोत्तम बने। विकट परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने धर्म और नैतिकता का साथ नहीं छोड़ा। उनके जीवन से हमें आदर्श आचरण की सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि पूर्ण जीवन चरित्र है। इसके अध्ययन और श्रवण से मनुष्य न केवल चिंताओं से मुक्त होता है, बल्कि उसके व्यवहार में भी सकारात्मक परिवर्तन आता है। कथा के विभिन्न प्रसंगों को सुनकर पूरा पंडाल राममय हो गया, वहीं भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। ...
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