पलामू, अगस्त 30 -- मेदिनीनगर, प्रतिनिधि। शहर के जैन मंदिर में पर्यूषण पर्व के दूसरे दिन मार्दव धर्म पर प्रतिष्ठाचार्य अन्नू भैया ने कहा कि मार्दव धर्म का अर्थ सौम्यता कोमलता, नम्रता और दयालुता है। यह जैन धर्म के दस लक्षणों (दसलक्षण पर्व) में से एक है, जो व्यक्ति को अहंकार और घमंड को त्यागकर विनम्र बनने के लिए प्रेरित करता है। मार्दव धर्म के पालन से करुणा बढ़ती है, इंद्रियों पर नियंत्रण आता है और यह संसार सागर से पार कराने में सहायक होता है। यह धर्म व्यक्ति को अपने ज्ञान, धन, रूप, या किसी भी अन्य श्रेष्ठता पर घमंड करने से रोकता है, दूसरों के प्रति उदारता और दया का भाव रखना सिखाता है। यह बुरे विचारों के विकास को रोकता है और कड़वाहट को खत्म करता है। मार्दव धर्म से दृष्टिकोण शुद्ध होता है। मनुष्य स्वयं के साथ-साथ तीनों लोकों के प्राणियों के ल...
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