नई दिल्ली, जुलाई 15 -- विवेक काटजू,पूर्व राजनयिक अमेरिका और ईरान के बीच जून में जिस 'मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग' (सहमति-पत्र) पर सहमति बनी थी, वह पिछले हफ्ते नए हमलों की शुरुआत के साथ तार-तार हो चुकी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया है कि तेहरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई करनी होगी। हालांकि, दोनों देश यह जानते हैं कि कुछ ऐसी लाल रेखाएं हैं, जिनके भीतर ही उनको रहना होगा। अगर उन्होंने इन हदों को पार किया, तो खाड़ी के तेल व गैस भंडारों को व्यापक क्षति पहुंचेगी और यहां जनजीवन खतरे में पड़ सकता है। अमेरिकी हमलों के कारण ईरान से पलायन भी शुरू हो सकता है। ये ऐसी परिस्थितियां हैं, जिन्हें न अमेरिका चाहता है, न ईरान और न ही दुनिया का कोई अन्य देश। मुश्किल यह है कि अमेरिका में ट्रंप और ईरान में रिवोल्यूशनरी गार्ड्स हठधर्मिता का ...