नई दिल्ली, फरवरी 3 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार और भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त को उस सुझाव पर विचार करने को कहा है, जिसमें जनगणना 2027 में जाति की गणना सिर्फ स्व-घोषणा के बजाय एक सत्यापन प्रणाली आधार पर करने का आग्रह किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने जनगणना में नागरिकों की जाति संबंधी आंकड़ों को दर्ज करने, वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर सवाल उठाने वाली जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए यह निर्देश दिया है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि है कि 'इसमें प्रासंगिक मुद्दा उठाया है, ऐसे में सक्षम प्राधिकारियों को जनगणना अधिनियम 1958 के तहत इन सुझावों पर विचार करना चाहिए। बेंच ने याचिकाकर्ता व शिक्षाविद आकाश गोयल से कहा ...
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