अपनी कलम की पैनी धार से अंग्रेजों पर वार करते रहे 'तन्मय'
ललितपुर, अगस्त 12 -- ललितपुर। अंग्रेजी हुकूमत की बेड़ियों को अपनी कमल की पैनी धार से काट भारत माता को आजाद कराने के लिए संघर्षरत रहे हुकुमचंद्र बुखारिया 'तन्मय' महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित थे और उनके आंदोलनों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया करते थे। ब्रिटिश सरकार की खिलाफत करते हुए वह दो बार जेल गए और कारागार में ही 'पाकिस्तान' खंड काव्य लिख डाला। यह आज भी प्रख्यात रचनाओं में शुमार है। बुंदेलखंड स्थित ललितपुर जनपद के एक मध्यमवर्गीय परिवार में 24 जनवरी 1921 को एक बच्चे ने जन्म लिया था, जिसका नाम हुकुमचंद बुखारिया रखा गया। बचपन से ही उनको लेखन का बहुत शौक था। यह भी पढ़ें- जंग-ए-आजादी में कूदे, शिक्षा की अलख जगा बन गए बुंदेलखंड के मालवीय साथ ही अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उनके भीतर आग सुलग रही थी। जो 1940-41 में व्यक्तिगत सत्याग्रह प्रारम्भ होने से प...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.