शिमला, अगस्त 4 -- हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम के तहत एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि यदि कोई सास लंबे समय तक बहू और परिवार के साथ एक ही घर में साझा गृहस्थी का हिस्सा बनकर रह रही है, तो केवल इस आधार पर उसे घर से नहीं निकाला जा सकता कि मकान बहू ने अपनी कमाई से खरीदा और बनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में साझा गृहस्थी का अधिकार भी कानून के तहत संरक्षित है।.साझा गृहस्थी का अधिकार खत्म नहीं हो जाता जस्टिस राकेश कैंथला ने बहू की याचिका खारिज करते हुए मंडी की निचली अदालतों के उस आदेश को सही माना, जिसमें सास को दोबारा घर में संयुक्त कब्जा देने के निर्देश दिए गए थे। अदालत ने अपने फैसले में साफ कर दिया कि किसी मकान का मालिकाना हक किसी एक शख्स के नाम होने भर से साझा गृहस्थी का अधिकार खत्म ...