अन्नदाताओं के लिए परिवार का भरण-पोषण करना बड़ी समस्या
पाकुड़, मई 18 -- प्रखंड क्षेत्र के किसानों का मुख्य आजीविका का श्रोत कृषि है। राज्य गठन के बाद से अबतक सिंचाई की स्थायी व मुक्कमल व्यवस्था नहीं हो पाई है। यह कृषकों के लिए अभिशाप साबित हो रहा है। महेशपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत महेशपुर प्रखंड कृषि प्रधान इलाका है। यहां के कुल आबादी का आधे से अधिक लोग कृषि कार्य पर आधारित हैं। कृषकों को अन्नदाता की संज्ञा दी गई है। सिंचाई की स्थायी व्यवस्था का नहीं हो पाना इन अन्नदाताओं को अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए एड़ी-चोटी एक करना इनकी विवशता बनी हुई है। बताते चलें कि महेशपुर प्रखंड की स्थापना 1अप्रैल 1955 को हुई थी। प्रखंड का कुल क्षेत्रफल 44372 है। इस क्षेत्र की तकरीबन 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर आश्रित है। अंचल कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक कुल कृषि योग्य 32906 हेक्टेयर भूमि है। गैर कृषि यो...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.