झांसी, अगस्त 24 -- झांसी। अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान में सोमवार को गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने भगवान की दिव्य ज्योति को अनौखे दीपक की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि सभी दीपक आपके सामने जुगनू के समान हैं। ईंधन एवं बिना घी बाती रहित आपका दीपक जो कितने ही आंधी तूफान आ जाये उसमें अडिग रहते हुए तीनों लोकों को प्रकाशित कर रहा है।आपकी परम ज्योति केवल्य ज्ञान की ज्योति जिसकी उपमा किसी से भी नहीं दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस धरा धाम के जीवों की दृष्टि ज्योति विहीन कुदरत की ओर निहारती है। जबकि जीव ही एक ऐसी पुनीत पावन आत्मा है जो केवल्य ज्ञान की ज्योति को ज्वाजल्यमान कर सकता है इसलिए संसारिक चमक-दमक को छोड़ प्रभु की अनौखी ज्योति को निहारने की आदत बना लो तुम्हारे भीतर भी स्वत: ज्ञान की ज्योति जागृत हो ...