अनूठे कैनवास पर प्रकृति के प्रति कलात्मक संवेदना
वाराणसी, जुलाई 12 -- वाराणसी। बीएचयू में दृश्य कला संकाय के अहिवासी कला दीर्घा में रविवार को 30 कलाकारों ने अनूठे ढंग से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। प्रकृति के प्रति उनकी कलात्मक संवेदना अद्भुत रही। लकड़ी, लोहे और गत्ते से बनी संदूकों पर उनके चित्रांकन ने लोगों को मोह लिया। 17वें अंतरराष्ट्रीय रंग मल्हार के अंतर्गत कलात्मक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम संयोजक डॉ. सुरेश जांगिड़ ने बताया कि वर्ष 2010 में नवाचार का प्रारंभ जयपुर के प्रसिद्ध कलाकार डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने किया। इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर हर साल जुलाई में इसका आयोजन होता है। प्रत्येक वर्ष नए चित्र तल पर अभिव्यक्ति में रंग भरे जाते हैं। छाता, टी-शर्ट, हेलमेट, मास्क, साइकिल, कार, लालटेन, पंखी, कैरी बैग, ग्लोब, ध्वज, चाय की केतली, एप्रन और खाने की प्लेट कल...
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