अनुमोदन की मुहर लगती रही, रिकॉर्ड की खामी नजर न आई
अलीगढ़, अगस्त 19 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। बालजीवन मेडिसिन्स के लाइसेंस में मृत वैद्य का नाम 18 साल तक बने रहने के मामले ने अब विभाग की पूरी लाइसेंसिंग प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग भले ही इसे लखनऊ मुख्यालय के डाटा अपडेट न होने की त्रुटि बता रहा हो, लेकिन सवाल यह है कि 2009 के बाद हर अनुमोदन और नवीनीकरण में स्थानीय से लेकर उच्च स्तर तक अधिकारियों ने रिकॉर्ड का सत्यापन किस आधार पर किया? एक मामूली रिकॉर्ड त्रुटि को सुधारने में विभाग 18 साल क्यों लगा रहा है? कंपनी के तकनीकी स्टाफ में बदलाव के लिए समय-समय पर विभागीय अनुमोदन लिए जाने की बात अधिकारी खुद कह रहे हैं। यदि ऐसा है तो प्रत्येक बार प्रस्तुत दस्तावेजों में तकनीकी स्टाफ की सूची भी सामने आई होगी। ऐसे में मृत वैद्य का नाम लगातार रिकॉर्ड में मौजूद रहने के बावजूद किसी अधिकारी ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.