नई दिल्ली, नवम्बर 8 -- सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी कर्मचारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) का आदेश देना न तो दंडात्मक होता है और न ही इससे उसके चरित्र पर कोई दाग लगता है। ऐसे आदेश से कर्मचारी के आचरण पर कोई सवाल नहीं उठता और न ही इसका अर्थ यह है कि वह कदाचार (Misconduct) का दोषी पाया गया है। जस्टिस मनमोहन एवं जस्टिस चंद्रशेखर की बेंच ने 14 कर्मचारियों में से पांच को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के छत्तीसगढ़ सरकार के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि ऐसा फैसला सक्षम प्राधिकारी के इस आकलन पर आधारित होता है कि संबंधित कर्मचारी को सेवा में बनाए रखना अब जनहित में नहीं है। इस दिवाली अपना ग्रीटिंग कार्ड्स खुद बनाएंअनिवार्य सेवानिवृत्ति का मतलब कदाचार नहीं बेंच ने कहा, ''अनिवार्य सेवानिवृत्ति का आदेश न तो दंडात्मक होता है और न ही...