गोरखपुर, दिसम्बर 5 -- गोरखपुर। जीवन का मूल जल और वायु पर टिका है। पृथ्वी पर उपलब्ध जल में से मात्र 0.62 प्रतिशत ही ग्राउंड वाटर बचा है, जो पीने योग्य है। बाकी का जल या तो समुद्र में या बर्फ के रूप में या फिर स्थल पर नदियों-तालाबों में है, जिन्हें हमने प्रदूषित कर रखा है। यह बातें प्रो. राम आशीष यादव ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय के मदन मोहन मालवीय टीचर ट्रेनिंग सेंटर की ओर से 11वां गुरुदीक्षा कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि आवश्यकता से अधिक पानी के उपयोग की वजह से जगह-जगह पानी की समस्या बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि नदियों को इतना गंदा कर दिया गया है कि उसका संपर्क भूमिगत जल से टूट गया है। प्रो. धनन्जय कुमार ने व्यक्तित्व विकास पर कहा कि पर्सनालिटी वह है जो दूसरे आपके बारे में अनुमान लगा सकें। प्रो. जय प्रकाश चतुर्वेदी ने भ...
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