नई दिल्ली, मई 22 -- 17 मई से शुरू ज्येष्ठ माह का अधिकमास 15 जून 2026 को खत्म होगा। अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित एक विशेष महीना है। इस मास में की गई पूजा, भोग और दान का फल अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है। पुरुषोत्तम मास में 33 मालपुए का भोग लगाकर दान करना भी एक प्रमुख और अत्यंत फलदायी अनुष्ठान माना जाता है। पद्म पुराण में इसका विशेष उल्लेख मिलता है। आइए जानते हैं कि अधिकमास में 33 मालपुए का दान क्यों किया जाता है और इससे क्या महत्वपूर्ण लाभ होते हैं।अधिकमास में 33 मालपुए का महत्व अधिकमास भगवान विष्णु का अपना मास है। शास्त्रों के अनुसार, इस दौरान विष्णु जी को मालपुआ अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस मास में उन्हें मालपुए का भोग लगाया जाता है। 33 मालपुए का विशेष महत्व इसलिए है, क्योंकि हिंदू शास्त्रों में 33 कोट...