अधिकमास के नौवें और 10वें अध्याय की कथा पढ़ें, कैसे एक कन्या ने अधिकमास का अपमान कर दुख पाया
नई दिल्ली, मई 23 -- अधिकमास की कथा का हम यहां नवां अध्याय और दसवां अध्याय दे रहे हैं। आप यहां से इसकी कथा पढ़ सकते हैं। नवां अध्याय की कथा- सूत जी कहने लगे कि इसके बाद नारद जी ने मेधावी ऋषि की कन्या का वृतान्त पूछा। नारद जी ने पूछा-हे प्रभो! फिर उस ऋषि कन्या ने वन में क्या किया, क्या किसी ऋषि ने उसके साथ,वित्वाह किया। तब नारायण ने कहा कि उस कन्या ने दुःख के साथ अपने पिता का स्मरण करते हुए वहां आश्रम में रहकर कुछ काल व्यतीत किया। भाग्यवश एक दिन उस वन में अचानक महाकोप वाले दुर्वासा मुनि आ गए। आश्रम में मुनि को आता हुआ देखकर शोक सागर में डूबी हुई उस कुमारी ने मुनि के चरणों में नमस्कार किया। नमस्कार करके मुनि को अपने आश्रम में लाई। अर्ध्य, पाद्य और वन के नाना प्रकार के फलों से आदर करके मुनि का पूजन किया। फिर मुनि कन्या आदर से कहने लंगी-हे मु...
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