दिल्ली, अप्रैल 10 -- भारत का उच्चतम न्यायालय एक ऐसे मामले पर चर्चा कर रहा है, जो तय कर सकता है कि "धार्मिक रीति-रिवाज" या "संवैधानिक अधिकार" कौन धार्मिक-स्थल पर महिला अधिकार को निर्धारित करता है.सुनवाई 22 अप्रैल तक चलेगी.सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला विवाद समेत कई जनहित याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है.इसने धर्म और संविधान के बीच बहस को फिर तेज कर दिया है.मामला सिर्फ महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश तक सीमित नहीं है.यह तय होगा कि अदालतें धार्मिक परंपराओं में कितना दखल दे सकती हैं.क्या पीरियड लीव महिलाओं के लिए भेदभाव का नया कारण बन सकती है?सुप्रीम कोर्ट के नौ जजों की संवैधानिक बेंच ने इस मामले पर 7 अप्रैल को सुनवाई शुरू की.सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सरकार का पक्ष रख रहे हैं.केंद्र सरकार ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाने का ...