अदालत की मुख्य जिम्मेदारी है सच का पता लगाना : सुप्रीम कोर्ट
नई दिल्ली, सितम्बर 7 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पांच साल की बच्ची से दुष्कर्म में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बरी करते हुए कहा कि आपराधिक मुकदमा सिर्फ अभियोजन पक्ष और आरोपी के बीच की लड़ाई से कहीं ज्यादा है। अदालत की मुख्य जिम्मेदारी सच का पता लगाना और निष्पक्ष न्याय सुनिश्चित करना है। न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट, दोनों ने ही उस व्यक्ति को दोषी ठहराने और उसकी सजा बरकरार रखने में गंभीर गलती की थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के निष्कर्ष जिन्हें हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया था कि अभियोजन पक्ष का मामला विश्वसनीय और ठोस सबूतों पर आधारित है, तथ्यों और कानून, दोनों ही नजरिए से पूरी तरह गलत और टिकने लायक नहीं हैं। आपराधिक मुकदमा सिर्फ अभियोजन पक्ष और आरोपी के बीच का टकरा...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.