नई दिल्ली, मार्च 7 -- प्रभात कुमार नई दिल्ली।पारंपरिक अदालतों, खासकर उच्च न्यायालयों में मुकदमों के बोझ को कम करने और त्वरित न्याय देने के मकसद गठित विभिन्न न्यायाधिकरण (ट्रिब्यूनल) अब खुद मुकदमों के बोझ से दब गया है। न्यायाधिकरणों में एक तरफ जहां मुकदमों का पहाड़ खड़ा हो गया है, वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इसके काम काज पर सवाल उठाते हुए 'इसे सिरदर्द और बोझ' बताया। कानून मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक ऋण वसूली न्यायाधिकरण, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट), आयकर, सीमा शुल्क एवं उत्पाद शुल्क न्यायाधिकरण सहित विभिन्न न्यायाधिकरणों में 5 लाख से अधिक मामले लंबित हैं। इन न्यायाधिकरणों में मुकदमों के बोझ का प्रमुख वजह बड़े पैमाने पर अध्यक्ष, सदस्यों और कर्मचारियों की कमी है।केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के आंकड़ों के म...