अदालतों को राजनीति से बचाना है, तो नागरिकों के सवालों का रास्ता भी खुला रखिए
नई दिल्ली, अक्टूबर 19 -- क्या आपने कभी सोचा है कि जब कोई राजनेता अपने वादे पूरे नहीं करता, तो हम उसे चुनाव में सत्ता से बाहर करने की कोशिश करते हैं। जब सरकारी अधिकारी काम नहीं करते, तो हम सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगते हैं। लेकिन जब बात न्यायपालिका की आती है, तो सार्वजनिक सवाल पूछने से पहले ही हमारे मन में हिचक क्यों पैदा हो जाती है? जिस संस्था के एक फैसले से करोड़ों लोगों के अधिकार, सरकार की नीतियां और समाज की दिशा प्रभावित हो सकती है, उसके कामकाज पर सवाल उठाना आखिर इतना संवेदनशील विषय क्यों बन जाता है? यह सवाल अदालतों के सम्मान को कम करने के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र में उनकी भूमिका को बेहतर ढंग से समझने के लिए जरूरी है। न्यायपालिका कोई सामान्य संस्था नहीं है। संविधान ने उसे असाधारण शक्तियां इसलिए दी हैं, ताकि वह सरकार और बह...
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