विधि संवाददाता, मार्च 12 -- UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने एक आदेश में कहा है कि राज्य को यह समझना चाहिए और ध्यान में रखना चाहिए कि एक बार न्यायालय ने कोई न्यायिक आदेश कर दिया है तो उसका पालन किया जाना अनिवार्य है, या फिर उसे किसी उच्च अदालत के आदेश से स्थगित किया जाना चाहिए। राज्य आदेशों का पालन नहीं करता है और न ही उन्हें स्थगित कराने के लिए कोई कदम उठाता है तो यह घोर उल्लंघन माना जाएगा। ऐसी परिस्थितियों में राज्य के अधिकारियों को अवमानना के लिए दंडित किया जाना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने आशा त्रिपाठी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। खंडपीठ ने कहा कि कोर्ट ऐसे मामलों से परेशान है, जिनमें याचियों ने वैकल्पिक उपाय का लाभ उठाया जो, जो दीवानी अदालतों से मिला ...
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