विधि संवाददाता, सितम्बर 14 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मानसिक बीमारी से 55 प्रतिशत दिव्यांगता वाले नीट-यूजी 2026 अभ्यर्थी को दिव्यांग श्रेणी में आरक्षण का लाभ देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जब सक्षम प्राधिकारी की ओर से जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र उपलब्ध है तो मेडिकल बोर्ड की ओर से दिव्यांगता प्रतिशत कम आकलन करने के आधार पर अभ्यर्थी को आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा एवं न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने आलोक कुमार गुप्ता की याचिका पर दिया है। अधिवक्ता दुर्गा शंकर शुक्ल ने याची की ओर से पक्ष रखा। यह भी पढ़ें- देश में एमबीबीएस की 3275 सीटें और बढ़ीं, आ गया NMC का नया सीट मैट्रिक्स याची के पास 30 जून 2025 का स्थायी दिव्यांगता प्रमाणपत्र था। इसमें उसे मानसिक बीमारी से पीड़ित व 55 प्रतिशत दिव्य...